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पापों से छुटकारा -- डॉ. जे सैमुएल सुधाकर

आज के लिए अनुच्छेद : '... मुझे इस म्रृत्यु कि देह से कौन छुड़ाएगा' ।रोमियों 7:24।

जो मनुष्य जन्म लेता है वह पापों से भरा होता है क्योंकि उसकी माता ने उसे पाप में से लाया। उसके बचपन से ही अवज्ञा उसके दिल में है। जब उसे कुछ नहीं करने का आदेश दिया जाता है तो वह वही करता है और इसके विपरीत। इस तरह पाप उसके दिल पर काबू पाने और शासन करने की कोशिश करता है। जब वह बढ़ता है तो वह बेकाबू हो जाता है।

पौलुस स्वयं कहता है कि एक बार उसका जीवन प्रकाश के बिना था, जो परमेश्वर का ज्ञान है। वह प्रकाश के लोगों को सताता था, यह सोच कर कि वे परमेश्वर के विरुद्ध पाप कर रहे हैं। अंत में प्रभु को उससे मिलना था और उसकी जिंदगी को बदलना पड़ा और उसे अपने जीवन में परमेश्वर के उद्देश्य को समझना पड़ा। परमेश्वर की कृपा से और परमेश्वर की बुलाहट के अनुसार, परमेश्वर के बच्चों की आंखें अब अपने पापी जीवन के लिए खुली हैं। वे मुक्ति के लिए चिल्लाते हैं। यहोवा उन्हें बचाता है और वे परमेश्वर के लिए चमकने का फैसला करते हैं।

प्रेरित पौलुस ने कहा, 'क्योंकि जिस अच्छे काम कि मै इच्छा करता हूँ, वह तो नही करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नही करता, वही किया करता हूँ' (रोमियों 7:19)। पौलुस ने खुद के बारे में बात की, 'हे दुःखद आदमी जो मैं हूं। कौन मुझे इस शरीर से बचा सकता है जो पाप की वजह से मृत्यु है 'और उन्होंने परमेश्वर का धन्यवाद किया कि प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिसने अपने शरीर से पाप तोड़ दिया और उसे परमेश्वर के लिए चमकने दिया। इसी प्रकार, प्रभु ने आज्ञा का उल्लंघन करने के हर युव को तोड़ दिया और आज आपको अपने वचन का प्रचार करने के लिए स्वतंत्र बनाया है। उसने आपके पापी शरीर को अनन्त विनाश से छुड़ाया है और आप को मुक्त कर दिया है। अब आप अनन्त राज्य के मार्ग पर हैं। उसने आपका जूआ तोड़ा है। अब जब आप मुक्त हैं, तो दूसरों को छुटकारा देना जारी रखें।

प्रार्थना : यहोवा, मुझे दूसरों को उद्धार करने दे जैसे आपने मुझे उद्धार दिया है। आमीन।


विचार : जो लोग स्वतंत्र हो चुके हैं वे दूसरों को मुक्त करने का प्रयास करेंगे।